उपदेशक के उपदेश बहुत ही सटीक , और ग्रहण करने लायक होते हैं । लेकिन होता यह है कि इन उपदेशों का असर सिर्फ शराब के नशे की भांति होता है --यह कुछ ही देर में उतर जाता है । यदि उपदेशों को टॉनिक के रूप में लिया जाए तो लंबे समय तक असरदार रहेंगे । ऐसे समारोहों में उपस्थित श्रोताओं में से प्रति समारोह ,एक श्रोता भी यदि ये उपदेश अपने जीवन में बसा ले तो व्यक्ति के व्यक्तित्व ,और फिर समाज, में बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा । इंसान गिरगिट की तरह रंग बदलना छोड़ कर, एक ही रंग में रंग जाएगा, तभी यह संभव हो पाएगा ।