*दोहरा चरित्र निभाता है पिता*
एक को देता सम्मान ,
दूसरे पर प्यार लुटाता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
एक से दुनियादारी समझता,
दूसरे को समझाता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
एक को संभालता तो,
दूसरे को संवारता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
एक से पाता संस्कार,
दूसरे को सिखाता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
एक का बनता है शिष्य ,
दूसरे का गुरु बन जाता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
एक के लिए बालक तो,
दूसरे के लिए पालक है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।
अपने पिता के लिए बेटा है पिता,
तो बच्चों के लिए पिता है पिता,
दोहरा चरित्र निभाता है पिता।