गुमसुम सी खड़ी थी मैं अपने दर पर
अचानक से ये मुझे क्या हो गया
होश हवास खो बैठी मैं
जब मुझे वो चांद कह के गया।
यूं ही कुछ लोग खफा हैं, हमसे भी इस शहर में
क्योंकि हर एक से अपनी, तबीयत नहीं मिलती ।
ढाया है ज़फाओं ने कुछ ऐसा सितम,
किसी दिल में हमें वफा नहीं दिखती ।
जमाने की धारा में बहना है कबूल
किनारो पर हमें खुशी नहीं मिलती।
आखिरी वक्त जब आएगा तो फिर,
सांसों की कहीं से सौगात नहीं मिलती।
आशिकी कर ली है मैंने हवाओं से,
क्योंकि उसके बिना कोई चीज नहीं जलती।
होने को तो है लाखों दिलदार यहां,
किसी दिल से मेरे दिल की कली नहीं खिलती।
ए चांद तू ही कुछ करम कर मुझ पर,
इन सितारों से तो चांदनी नहीं मिलती।
हाले दिल तो लिखा है खत में,
कैसे भेजूं कभी फुर्सत ही नहीं मिलती।
वादा किया है तो खिलाफी तो न कर,
माना कि वादों से जिंदगी नहीं चलती।
Ckkk
शून्य में खड़ी हो तुम,
बहती हुई हवाएं ना देखीं।
जफ़ाओं को दिल से लगाया,
मेरी वफाएं ना देखीं।
मौसम कुछ उदास है,
कोई न आसपास है।
यह मौसम कभी तो बदलेगा,
मेरे मन में यही आस है।
बिजलियां सी कौंध जाती थी कभी,
घेर कर बैठते थे आसपास सभी।
ऐसा क्या हो गया कुछ तो बताओ,
आखिर क्यों हो गए सभी अजनबी।
क्यों जख्म देती हो मेरे जज्बातों को,
भूल जाओ जो हुआ उन बातों को।
देखो ना मुझे न दिन को चैन,
और न नींद है रातों को।
सोचता हूं तुम्हें कविता लिखूं,
नहीं नहीं कोई ग़ज़ल लिखूं।
देखे जब तू उस ग़ज़ल को,
तो ग़ज़ल में बस मैं ही दिखूं।
तड़पता दिल मेरा क्या देखा जाएगा,
तुम्हारा दिल मेरे ही सुर में गाएगा
मैं जानता हूं इतना कठोर तो नहीं,
यह दिल क्या तुम्हें रोक पाएगा।
चलो एक बार फिर वहीं लौट चलें,
जिस दहलीज को पार कर के,
नए जीवन में प्रवेश करते हुए ,
रंगीन सपने संजोये थे।
कहते हैं प्यार में कोई शर्त नहीं होती,
पर याद करो उन सात वचनों को,
जिन्हें निभाने का सिर्फ मैंने ही नहीं,
तुमने भी किया था वादा ।
मिलने को तो गुण मिल गए थे,
लेकिन यथार्थ में नहीं मिल पाए।
तुमने बस अपने गीत गाए,
और मैंने भी अपने ही गीत गाए।
इस तरह कैसे जिंदगी बसर होगी,
न तो तुम्हें संतोष मिलेगा,
ना ही मुझे खुशी होगी।
चलो एक बार फिर,
हम दोनों अजनबी बन जाएं।
जो हो गया हो उसे भूल जाएं।
तुम्हारी कमियों को,
मैं नजर अंदाज करूं,
और मेरी कमियों को तुम।
चलो एक बार फिर,
दहलीज के उस पार चलें,
और नए सिरे से फिर,
नए जीवन में प्रवेश करें।