यूं ही कुछ लोग खफा हैं, हमसे भी इस शहर में
क्योंकि हर एक से अपनी, तबीयत नहीं मिलती ।
ढाया है ज़फाओं ने कुछ ऐसा सितम,
किसी दिल में हमें वफा नहीं दिखती ।
जमाने की धारा में बहना है कबूल
किनारो पर हमें खुशी नहीं मिलती।
आखिरी वक्त जब आएगा तो फिर,
सांसों की कहीं से सौगात नहीं मिलती।
आशिकी कर ली है मैंने हवाओं से,
क्योंकि उसके बिना कोई चीज नहीं जलती।
होने को तो है लाखों दिलदार यहां,
किसी दिल से मेरे दिल की कली नहीं खिलती।
ए चांद तू ही कुछ करम कर मुझ पर,
इन सितारों से तो चांदनी नहीं मिलती।
हाले दिल तो लिखा है खत में,
कैसे भेजूं कभी फुर्सत ही नहीं मिलती।
वादा किया है तो खिलाफी तो न कर,
माना कि वादों से जिंदगी नहीं चलती।
Ckkk
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