ए चांद तू जल्दी आना।
सकल जग घिरा अंधेरे में,
घूम रहा संदेहों के घेरे में।
मेरे मन में उजियारा भर जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
व्याकुल मन से बाट जोह रही कब से,
मैं पल-पल को जोड़ रही तब से।
अनंत को शून्य तू कर जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
कह कर गए थे जल्दी आऊंगा,
चांद जब पूरा निकलेगा उस दिन आऊंगा ।
न शरमा मुख पूरा दिखला जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
उनके बिन सूनी है नगरिया,
पथरीली सी लगे सभी डगरिया।
यह बात उन्हें बता जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
तू ओढ़े तारों की चुनरिया,
सूना पड़ा है मेरा हिया।
मेरे दिल को भी हर्षित कर जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
आ जायेंगे जब मेरे साजन,
तेरी चांदनी उतरेगी मेरे आंगन।
तब मेरा व्रत पूरा कर जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।
Mssa
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