शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

ए चांद तू जल्दी आना-- कविता

 तुझ बिन नहीं कोई भी मौसम सुहाना,
  ए चांद तू जल्दी आना। 

 सकल जग घिरा अंधेरे में,
 घूम रहा संदेहों के घेरे में।
 मेरे मन में उजियारा भर जाना,
 ए चांद तू जल्दी आना।

 व्याकुल मन से बाट जोह रही कब से,
 मैं पल-पल को जोड़ रही तब से।
  अनंत को शून्य तू कर जाना,
 ए चांद तू जल्दी आना। 

 कह कर गए थे जल्दी आऊंगा,
 चांद जब पूरा निकलेगा उस दिन आऊंगा ।
  न शरमा मुख पूरा दिखला जाना,
  ए चांद तू जल्दी आना। 

उनके बिन सूनी है नगरिया,
 पथरीली सी लगे सभी डगरिया।
 यह बात उन्हें बता जाना,
 ए चांद तू जल्दी आना। 

तू ओढ़े तारों की चुनरिया,
  सूना पड़ा है मेरा हिया।
 मेरे दिल को भी हर्षित कर जाना,
 ए चांद तू जल्दी आना।
 
  आ जायेंगे जब मेरे साजन,
तेरी चांदनी उतरेगी मेरे आंगन।
तब मेरा व्रत पूरा कर जाना,
ए चांद तू जल्दी आना।

Mssa

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें