गुरुवार, 22 जून 2023

जिंदगी -- कविता


 जिंदगी यह कैसी है जिंदगी,

 कभी लगती है उलझी हुई पहेली।

और कभी मेरे संग संग चलती,

 मेरी अतरंग सी सहेली।

 कभी सपाट राहों पर सरपट दौड़ती,

  कभी गड्ढों भरी राहों पर उछलती कूदती।

  चिंघाड़ती अनवरत चलती ही रहती,

  कभी अचानक मौन हो ठहरती।

 कभी लगता है यहां अपनों का मेला है,

  कभी लगता हर इंसान यहां तो अकेला है।

 कभी जलेबी सी उलझी पर मीठी लगती,

और कभी लगता यह तो झमेला है।

 एक उम्र तक करते रहे बन्दगी,

 झुकती कमर सी लगती है जिंदगी।

 कभी नित नई आशाएं  लिये हुए,

   दुल्हन नवेली सी लगती है जिंदगी।

 जिंदगी जीते जीते निकल गई है जिंदगी,

 उमंग है दिल में फिर से मिलेगी नई जिंदगी।

 ना मिली चाही गई ठंडक न मिली उष्णता,

  कभी तो दाल जैसी गलेगी जिंदगी।

मंगलवार, 20 जून 2023

सुकून-- कविता

 दो पल भी सुकून के ना मिल सके,

जिंदगी बस यूं ही गुजर गई।

 जिंदगी से मेरी और,

  मेरी , जिंदगी से ठन गई। 

मकसद तो कोई नजर आता नहीं

 क्या बताएं बस,जिये जा रहे हैं,

   फटे हाल अपने पलों को 

  बस यूं ही,सिये जा रहे हैं। 

खुशियों का उपवन मांगा तो,

 गमों का सागर लहराता मिला।

यहां कोई नहीं दिखता अपना,

 किससे करें शिकवा,किससे करें गिला।

जिंदगी चाहे कितनी ही बची हो, 

सुकून के पल कभी तो मिलेंगे।

उजड़े  हुए इस गुलशन में,

सुवासित पुष्प कभी तो खिलेंगे।


Mssa/दैनिक 



बुधवार, 14 जून 2023

कभी तुम नहीं - कविता

 कभी तुम नहीं कभी हम नहीं कहते,

 बस हौले से मुस्कुराते और चुप रहते।

 परिस्तिथिय कुछ ऐसी आ ही जाती हैं,

 लेकिन कुछ तुम सहते कुछ हम सहते। 

लोग उलझायेंगे हम तो आपस में ही समझ लेंगे,

 दुनिया थक जाएगी कोशिश करते करते। 

कौन कहता है कि दूरियां हैं हम दोनों के बीच 

 हम तो दोनों ही एक दूसरे के दिलों में बसते।

भूल जाएं जो भी गम अब तक सहे हैं हमने, 

 चलो मिलकर अब नई दुनियां हैं रचते। 

एक ऐसा दौर आ ही जाता है जिंदगी में,

 इसमें तुम न उलझो हम भी नहीं उलझते।


Mssa/ dainik

मंगलवार, 13 जून 2023

हमराह या हमसफर- कविता

 क्या हो हमराह या हमसफर

वादे तो तुमने कर दिए अब तक हजार, 

 लेकिन वह नहीं कहा जो कहना है सिर्फ एक बार।

जानती हूं मैं, कब से मेरे हमराही हो,

 मैं तो सिर्फ एक फूल और तुम फूलों की डाली हो।

 जब भी कोई मुसीबत हुई तुमने ही सहारा दिया,

कभी भी परायापन नहीं अपनापन दिखा दिया।

 सोचती हूं कैसी होगी वह जिंदगी जब हम तुम एक होंगे,

 तुम औरों की तरह नहीं तुम्हारे तो इरादे नेक होंगे।

कब तक यूं अकेले अकेले चलते रहेंगे, 

सिर्फ बातें करेंगे और मिलते रहेंगे।

 क्या हम ऐसे ही अलग-अलग जिंदगी करेंगे बसर,

 सच-सच बताओ तुम मेरे क्या हो, हमराह या हमसफर।


Mssa/दैनिक 

सोमवार, 12 जून 2023

ख़ुद की तलाश में हूं- कविता

 

मुझे कुछ खबर नहीं मैं कहां हूं 

अभी तो मैं खुद की तलाश में हूं।

विचरण कर रहा था ब्रह्मांड में

 अनंत में था या शून्य में

 किसी पर्वत शिखर पर ध्यान मग्न

 या फिर सागर की गहराई में डूबा हुआ

 मालूम नहीं क्यों कहीं गया 

अकेला ही हूं या अपनों के साथ में हूं

 अभी तो मैं ख़ुद की तलाश में हूं 

कोई कहता मैं ईश्वर का भक्त हूं 

कोई कहता कि ठहरा हुआ वक्त हूं

 ना मालूम किस खोज में चलता रहा

 ना जाने किस-किस की सुनता रहा

 कोई कहता कि मैं एक साधारण इंसान हूं

 कोई कहता कि ईश्वर की संतान हूं 

बागों में अनेकों किस्म के हैं फूल

 भंवरे मुझे ढूंढते हैं कहां-कहां

  मैं तो छिपा फूल पलाश में हूं। 

मुझे मालूम है तो सिर्फ इतना कि

 मैं अभी तक जिंदा अपनी लाश में हूं। 

रविवार, 11 जून 2023

प्यार में जान- कविता

 जान है तो जहान है इसे खो नहीं सकता,

यह जान तुझे दे देंगे ऐसा हो नहीं सकता।

 यह जान तो ऋणी है मेरे मां-बाप का,

  लेश मात्र भी ऋण नहीं किसी और का।

बड़े जतन से संभाला है मुझे मेरे अपनों ने,

 बालक से युवा बना दिया मुझे मेरे सपनों ने।

 मैंने तुमसे प्यार किया कभी भी न इनकार किया,

 तुम करो या न करो मैंने तो स्वीकार किया।

सुनो प्रिये प्यार में कोई शर्त नहीं हुआ करती है, 

 प्यार में दिल से दिल भावना से भावना जुड़ती है।

 हर किसी को प्यार के बदले प्यार नहीं मिलता,

बिन मौसम किसी बाग में फूल नहीं खिलता। 

 मेरे  प्यार को यदि तुम्हारी मंजूरी नहीं, 

 जानता हूं स्वीकार करो यह जरूरी नहीं।

 तुम्हारे प्यार के बदले तुम्हें प्यार ही दे सकता हूं,

 जान तो सिर्फ मेरी है,किसी को भी नहीं दे सकता हूं।


Mskm

शनिवार, 10 जून 2023

मुस्कराकर.... मिला करो.... 


यह क्या आते ही चल दिए, कुछ देर तो रुका करो यारों,

 कुछ देर रुक कर,मुस्कुराकर, दिल से मिला करो यारों।

कुछ तो बात थी तुममें जो हर किसी में नहीं,

 हमें आकृष्ट कर ले यह बात हर किसी में नहीं।

हम तो थे अपने आप में ही मस्त रहने वाले 

 अपने काम से काम और काम में व्यस्त रहने वाले।

 दोस्ती क्या है यह हम कल तक नहीं जानते थे,

 खून के रिश्ते के अलावा और किसी को नहीं मानते थे। 

क्या मालूम था एक दिन कोई ऐसा मिल जाएगा,

 यह निर्मोही दिल मेरा तुमसे मिलकर खिल जाएगा।

 जब भी मिलो,सिर्फ हाय-हेलो ना किया करो,

 थोड़ा रुको और फिर मुस्कुरा कर मिला करो।


Mssa/dainik

शुक्रवार, 9 जून 2023

काला धन- कविता

 काला काला काला काला 
 काला रंग सब से मतवाला 
काला हो या गोरा हो
 काले ने सबको रंग डाला 
गोरे गोरे गाल हों 
सिर पर हों काले केश, 
 काले धन वाले का तो भैया,
 सबसे ज्यादा है ऐश। 
काले कपड़े काला चश्मा 
और काली हो कार
 ऐसे लोगों को तो 
 बाकी रंग लगे बेकार
 सांवली सूरत लगे प्यारी 
सांवली मूरत पर जाएं बलिहारी 
सीधे सीधे जो आ जाता 
वह पत्नी जैसा लगता
 ऊपर से जो आता 
वह तो प्रेयसी जैसा भाता 
मन हो जाये जब काला
 काला धन लगे सुरा का प्याला
 काला धन पाने को जाल बुनते 
आ जाये तब दीवारों में चुनते
 काला धन जब हद से ज्यादा बढ़ जाता
 देश में नहीं स्विस बैंक में खाता खुल जाता
 एक दिन तो ऐसा आता
 जब छापा पड़ जाता
 मुँह छिपाते फिरते 
 तब गोरा मुँह भी काला हो जाता। 


बुधवार, 7 जून 2023

किसी नजर में- कविता

 किसी नजर में वह प्यार नजर नहीं आता,

कोई भी पल सुकून की खबर नहीं लाता।

 इंसान बनने की बहुत कोशिश की मैंने,

 पर मेरा इंसान बनना किसी को नहीं भाता। 

दुनियादारी क्या है यह मैं नहीं जानता, 

 इंसानियत के अलावा मैं और कुछ नहीं जानता।

 अब कोई तो मुझे बताएं कि,

 इंसान और मुझ में क्या नहीं कोई समानता।

 आस है मुझे कोई तो मुझे समझेगा,

 मेरे दिल में प्यार का मंजर नजर आयेगा।

 नजर से नजर और दिल से दिल जब मिलेंगे, 

 प्यार का समंदर लहराता नजर आयेगा।


Mssa

मंगलवार, 6 जून 2023

दर्द ऐसा था- कविता

  दर्द ऐसा था जो लिखा न जा सका, 

 बेदर्दी  दुनिया को बताया न जा सका।

 दर्द हमारा था हमें ही झेलना था, 

 दुनिया को बताते तो उसे तो खेलना था।

 जाने क्या सोच रखा था ऊपर वाले ने,

 तकदीर ही ऐसी बनाई थी उस रखवाले ने।

खुशी तो दे दी थी हजारों नहीं लाखों को, 

 दर्द भरे आंसू ही दे दिए मेरी आंखों को। 

अब तो तकदीर से भी संघर्ष करना होगा,

 दर्द के गम को खुशी में बदलना होगा।

 तभी मेरा दिल खुशी में झूम कर मगन होगा,

 यह समझ लो कि बादलों से घिरा हुआ गगन होगा।


Kalkkj

दुखती रग का सहारा- कविता

 *दुखती रग का कोई सहारा नहीं होता*

 सुख का उपवन हर किसी को सुहाता है, 

पर दुखती रग का कोई सहारा नहीं होता। 

 कहने को तो सभी अपने हैं यहां,

लेकिन वक्त पर कोई हमारा नहीं होता।

 किसी को किसी के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं होता,

 किसी का दुख देखकर किसी का दिल पिघलता है।

  एक नहीं बहुत हैं दुनिया में ऐसे बेदर्दी, 

 लेकिन फिर भी किसी का साथ तो मिलता है।

 विपत्ति कितनी भी आ जाए न घबराएं,

नदी ही नहीं समुद्र का भी किनारा होता है।

जिसका कोई भी नहीं इस दुनिया में,

 उसका ऊपर वाला तो सहारा होता है।


Kalkkj

मुक्तक -गलतियाँ

 दो दिलों के बीच से पर्दा हटा दीजिए, 

गुलशन में आकर बहार का मजा लीजिए।

इंसान हूं मैं भी आखिर, हो ही जाती हैं,

हो गई गलतियों की सजा दीजिए।


हम बेवफा नहीं, हमसे वफा कीजिए,

हमारे बेहतर हालात की दुआ कीजिए।

नादान परिंदा समझ इस नेक दिल इंसान को,

हो गई गलतियों की सज़ा दीजिए। 


मशहूर हो तो न मगरूरी का नशा कीजिए  

इस तरहा अपनी न औकात बता दीजिए।

इंसान की बेहतरी तो इसी में है कि, 

खुद को,हो गई गलतियों की सजा दीजिए।


लाचार है अपनी आदत से,अब क्या कीजिए,

हो गई हो हमसे कोई खता तो बता दीजिए।

यूं दूर होकर हमसे न नजरें चुराईये,

हो गई गलतियों की सज़ा दीजिए। 


 वक्त भी क्या क्या सितम ढाता है, 

 वक्त बदले तो बहुत कुछ बदल जाता है।

 जो अभी तक तो आज था,

 वह कल , कल में बदल जाता है।


Mssa

सोमवार, 5 जून 2023

तेरे ही सपनें- कविता

 तेरे ही सपने अब मेरी धरोहर बन गए हैं,

 ये ही सपने तेरी यादों के समंदर बन गए हैं। 

रात रात भर सपने ही देखे पल भर भी न सोया,

 उनिंदि सी आंखों से ,तेरे ही ख्यालों में खोया।

 आशा तो थी कि बनकर बदरिया झम झम बरसेगी,

 मालूम न था कि तुझे देखने को भी आंखे तरसेगी।

 सपने तो पहले भी देखे, पर ऐसे न थे,

 जिनका कोई अर्थ निकल सके वैसे न थे।

 अब तो दिन में तेरी याद और रात में सपने होते हैं,

 कुछ तो लगते पराये जैसे , कुछ अपने से होते हैं। 

   कहते हैं कि कोई सपना तो सच हो जाता है,

  जो मिलने की आस होती है वह मिल जाता है। 

ऐसे ही सपने की चाह में, सपने देख रहा हूं,

 तब तो तू आएगी , तेरी राह देख रहा हूं।


MSA /dainik

दिल अगर जिंदा है- कविता

 दिल अगर जिंदा है तो धड़कना ही काफी नहीं,

 आंख अगर है तो फड़कना ही काफी नहीं।

 दिल में एहसास का होना बहुत जरूरी है,

और आंखों में नमी का होना बहुत जरूरी है। 

 दिल में प्यार भरा हो और दया का वास हो,

 आंखों में करुणा हो और प्रेम की प्यास हो।

 संकुचित दिलों में कभी प्यार नहीं पनपता,

 जैसे बंजर भूमि में कोई फूल नहीं खिलता।  

 आंखें जिधर भी देखें उधर ही हो कुशलता, 

  अपने कर्म में सभी को अवश्य मिले सफलता।

 दिल हमारा स्वच्छ जल सा पारदर्शी हो जाए,

 तो निश्चित ही हमारी नजर समदर्शी हो जाए।


Nkkkd

जिंदगी एक पहेली-- गीत

 नादान जिंदगी हादसों में उलझी हुई है,

नहीं यह ऐसी पहेली जो सुलझी हुई है।

 कितनी भी बुझाना चाहो भड़कती आग को,

 पर क्या करोगे उस चिंगारी का जो सुलगी हुई है।

राहों में सरपट चलने का इरादा था,

 मंजिल तक पहुंचने का वादा था।

 लेकिन कोशिश हमारी रंग नहीं ला पाई,

 क्योंकि वक्त कम और फासला ज्यादा था। 

कोई बताए किस्मत पर भरोसा करें या न करें,

 जो भी जिंदगी में मिले उसे सहन करें या न करें।

 जिंदगी तो जीने के लिए मिलती है,

 फिर जिंदगी के लिए हम क्यों मरें। 

   सोचता हूं राह में रुकुं या चलता चलूँ, 

  दिल के दुख किसी को कहूं या ना कहूं।

   असमंजस के इस भँवर से बाहर निकलकर,

   जिंदगी की पहेली को शायद सुलझा सकूं। 


Mssa/दैनिक 


शुक्रवार, 2 जून 2023

चलता चल राही-- कविता

कोई भी समस्या नहीं है भारी,

गर समझो इसको जो जिम्मेदारी।

सुलझा न सको तो मुझको दे दो,

सुलझाने की अब मेरी है बारी।


कोई भी बाधा हो,कर देंगे नाकाम, 

मंजिल तक जाना है, करेंगे अपना नाम।

आगे कदम बढ़ायेंगे,बस चलते ही जायेंगे,

बस यूं ही कट जायेगा सफर। 

हौसला हो जब मन में मुश्किल हो आसान,

काम करेंगे कुछ ऐसा जग में हो जाये नाम।

नहीं किसी से डरना है, नहीं राह में रुकना है,

बस यूं ही कट जायेगा सफर।।


  चलता चल राही, तू चलता चल,

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,तू चलता चल--

आंधियों की तू परवाह न कर,

 बाधाएं आ जाएं तो आह न कर,

 निर्बाध गति से चलता चल, 

 चलता चल राही, तू चलता चल,

चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,तू चलता चल--

चाहे मंजिल तक पहुंचना लगे अनिश्चित,

 घबराना न तू कभी भी किंचित, 

 दृढ़ निश्चय से चलता चल, 

 चलता चल राही, तू चलता चल। 

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही तू चलता चल--

मंज़िल लगे पर्वत सी ऊंची,  

  या कभी सागर सी नीची,

  ऊंच नीच से परे चलता चल,

चलता चल राही,तू चलता चल।

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,चलता चल। 

 


Mssa / rssa