सोमवार, 5 जून 2023

तेरे ही सपनें- कविता

 तेरे ही सपने अब मेरी धरोहर बन गए हैं,

 ये ही सपने तेरी यादों के समंदर बन गए हैं। 

रात रात भर सपने ही देखे पल भर भी न सोया,

 उनिंदि सी आंखों से ,तेरे ही ख्यालों में खोया।

 आशा तो थी कि बनकर बदरिया झम झम बरसेगी,

 मालूम न था कि तुझे देखने को भी आंखे तरसेगी।

 सपने तो पहले भी देखे, पर ऐसे न थे,

 जिनका कोई अर्थ निकल सके वैसे न थे।

 अब तो दिन में तेरी याद और रात में सपने होते हैं,

 कुछ तो लगते पराये जैसे , कुछ अपने से होते हैं। 

   कहते हैं कि कोई सपना तो सच हो जाता है,

  जो मिलने की आस होती है वह मिल जाता है। 

ऐसे ही सपने की चाह में, सपने देख रहा हूं,

 तब तो तू आएगी , तेरी राह देख रहा हूं।


MSA /dainik

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