किसी नजर में वह प्यार नजर नहीं आता,
कोई भी पल सुकून की खबर नहीं लाता।
इंसान बनने की बहुत कोशिश की मैंने,
पर मेरा इंसान बनना किसी को नहीं भाता।
दुनियादारी क्या है यह मैं नहीं जानता,
इंसानियत के अलावा मैं और कुछ नहीं जानता।
अब कोई तो मुझे बताएं कि,
इंसान और मुझ में क्या नहीं कोई समानता।
आस है मुझे कोई तो मुझे समझेगा,
मेरे दिल में प्यार का मंजर नजर आयेगा।
नजर से नजर और दिल से दिल जब मिलेंगे,
प्यार का समंदर लहराता नजर आयेगा।
Mssa
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें