रविवार, 11 जून 2023

प्यार में जान- कविता

 जान है तो जहान है इसे खो नहीं सकता,

यह जान तुझे दे देंगे ऐसा हो नहीं सकता।

 यह जान तो ऋणी है मेरे मां-बाप का,

  लेश मात्र भी ऋण नहीं किसी और का।

बड़े जतन से संभाला है मुझे मेरे अपनों ने,

 बालक से युवा बना दिया मुझे मेरे सपनों ने।

 मैंने तुमसे प्यार किया कभी भी न इनकार किया,

 तुम करो या न करो मैंने तो स्वीकार किया।

सुनो प्रिये प्यार में कोई शर्त नहीं हुआ करती है, 

 प्यार में दिल से दिल भावना से भावना जुड़ती है।

 हर किसी को प्यार के बदले प्यार नहीं मिलता,

बिन मौसम किसी बाग में फूल नहीं खिलता। 

 मेरे  प्यार को यदि तुम्हारी मंजूरी नहीं, 

 जानता हूं स्वीकार करो यह जरूरी नहीं।

 तुम्हारे प्यार के बदले तुम्हें प्यार ही दे सकता हूं,

 जान तो सिर्फ मेरी है,किसी को भी नहीं दे सकता हूं।


Mskm

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें