*दुखती रग का कोई सहारा नहीं होता*
सुख का उपवन हर किसी को सुहाता है,
पर दुखती रग का कोई सहारा नहीं होता।
कहने को तो सभी अपने हैं यहां,
लेकिन वक्त पर कोई हमारा नहीं होता।
किसी को किसी के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं होता,
किसी का दुख देखकर किसी का दिल पिघलता है।
एक नहीं बहुत हैं दुनिया में ऐसे बेदर्दी,
लेकिन फिर भी किसी का साथ तो मिलता है।
विपत्ति कितनी भी आ जाए न घबराएं,
नदी ही नहीं समुद्र का भी किनारा होता है।
जिसका कोई भी नहीं इस दुनिया में,
उसका ऊपर वाला तो सहारा होता है।
Kalkkj
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