मंगलवार, 12 जुलाई 2022

खता हो गई(दिल की बात)

*खता हो गई*


दिल की बात दिल में ही रखूं, 

 या फिर किसी को तो कहूं।

 बता दी तो कहीं फ़साना न बन जाये,

 मेरी इस बात पर ज़माना ना हंस जाये।

 चलो अब मैं खोलता हूं अपने दिल की डायरी,

 हो सकता है बन जाये यह एक खूबसूरत शायरी।

  दिल ही दिल में चाहने लगे हम,

खत लिखा तो खता हो गई ।

छुपाई थी जो बात हमने ,

 अब उसे पता हो गई ।

 दे दिया था हमारा दिल जिसे,

 जाने क्यों हमसे खफा हो गई ।

अब कैसे करें वफा उससे, 

 जो खुद ही बेवफा हो गई ।



एक बार फिर से मुलाकात हो जाए


*एक बार फिर से मुलाकात हो जाए*


 अरसे से दिल में छुपा कर रखी थी 

राख बनी चिंगारी जो दबा रखी थी। 

 आम वह बात आज हो जाए,

  एक बार फिर से मुलाकात हो जाए।

  वफा ही करते रहे बेवफा न हुए,

  यादों से तेरी कभी जुदा न हुए।

 मेरा दिन कहीं रात न हो जाए,

  एक बार फिर से मुलाकात हो जाए। 

   हर राह तेरी ओर ही मुड़ती है,

 हर पल यादों की धूल उड़ती है।

  चाहे बुला ले या अकस्मात हो जाए,

  एक बार फिर से मुलाकात हो जाए।

  गम से कब तक गमगीन रहें, 

 तू ही बता कब तक हीन रहें। 

 अब आंसुओं की बरसात हो जाए,

  एक बार फिर से मुलाकात हो जाए।

  अब कोई राज,राज न रहे,

  दिन,दिन ही रहे,रात न रहे।

  अब तो तू ही मेरी हमराज हो जाए,

   एक बार फिर से मुलाकात हो जाए।