सोमवार, 16 मार्च 2026

बैठूं तेरे चरणों में -- भजन

 स्वार्थी , अधर्मी लोगों से दूर रहना गवारा है,

जिसके मन में हो अपनापन वही हमारा है,

 बैठूं तेरे चरणों में ओ मुरली वाले -

 बुढ़ापे की तू ही लाठी, तू ही सहारा है।


दुनिया में दिख रहा क्या क्या नजारा है,

किसी को उजाड़ा तो किसी को संवारा है,

मैंने तो जीवन कर दिया श्याम के हवाले-

तेरी भक्ति में रमा रहूं,यही मेरा सहारा है।


सेवा करवाने का मुझे कोई शौक नहीं,

 मैं तो बस सेवक ही बनना चाहता हूं ,

 श्रीराम बनने की तो मेरी औकात नहीं-

 मैं तो बस केवट ही बनना चाहता हूं।


और कहीं क्यों देखूं मैं तेरे सिवा,

तुझ को ही देखूं तू ही तो दर्पण है, 

 ईश्वर ने जो कुछ दिया है मुझको- 

 तेरा ही है, तुझको ही अर्पण है।

शनिवार, 14 मार्च 2026

नारी तू नारायणी - कविता

 *नारी तू नारायणी*

  नारी तू नारायणी,तू ही जग की जीवन दायिनी,

तपती हुई ग्रीष्म में भी,शीतलता देती हुई चांदनी।

 

सृष्टि की उत्पत्ति से ही देवताओं संग देवियां हुईं,

आज वही कोई मां, कोई बहिन, कोई बेटियां हुईं।


 देवी के दर्शाये जाते हैं दो से ज्यादा हाथ,

 क्योंकि कई-कई उत्तरदायित्व निभाती हैं एक साथ।


सौम्यता,सोहार्द, मधुरता की स्वामिनी होती हैं नारियां,

फिर भी कठिन से कठिन निभाती हैं जिम्मेदारियां।

 

घर में जब आती बेटी,बन जाती आंगन की फुलवारी, 

घर में लाती खुशहाली, बनती सबकी ही प्यारी। 


एक समय वह आता जब उसे ब्याहा जाता है,

 बेटी द्वारा पर द्वारे बाग सजाया जाता है।


जल,थल या नभ हो, हर जगह कदम बढ़ाया है, 

कदम जहां भी बढ़ाया,वहीं नाम कमाया है।


हे नारी- तू हर काल में,हर हाल में वंदनीय है, 

 ईश्वर ही नहीं तू भी मन मंदिर में पूजनीय है।


स्वरचित एवं मौलिक-

‌सतीश गुप्ता पोरवाल,मानसरोवर, जयपुर

रविवार, 1 मार्च 2026

हो तुम्हारा साथ - भक्ति कविता

 हो तुम्हारा साथ तो सुगम हो जीवन यात्रा, 

सुखों का हो अम्बार, दुखों की कम हो मात्रा।


भटकता है मन मेरा मायावी संसार में,

उलझ गया हूं मैं दुनियां के बाज़ार में।


अपने सभी अवगुणों को छोड़ दूं,

 साथ में सभी गुणों को जोड़ दूं।


नित ही नये- नये विचारों का सृजन करुं,

क्या सही और क्या ग़लत पर मनन करुं।


न करुं मैं किसी से भी कोई भेदभाव,

रखूं मन में, सभी के लिए समभाव।


अकेला तो कैसे मैं अवरोधों से टकराऊंगा,

ऐसे कैसे भवसागर को पार कर पाऊंगा।


अब तो बस रम जाऊं तुम्हारी भक्ति में,

ताकि संभावित वृद्धि हो मेरी शक्ति में।


असंभव सा नजर आता है पाना किनारा,

संभव तो तभी हो जब साथ हो तुम्हारा।