स्वार्थी , अधर्मी लोगों से दूर रहना गवारा है,
जिसके मन में हो अपनापन वही हमारा है,
बैठूं तेरे चरणों में ओ मुरली वाले -
बुढ़ापे की तू ही लाठी, तू ही सहारा है।
दुनिया में दिख रहा क्या क्या नजारा है,
किसी को उजाड़ा तो किसी को संवारा है,
मैंने तो जीवन कर दिया श्याम के हवाले-
तेरी भक्ति में रमा रहूं,यही मेरा सहारा है।
सेवा करवाने का मुझे कोई शौक नहीं,
मैं तो बस सेवक ही बनना चाहता हूं ,
श्रीराम बनने की तो मेरी औकात नहीं-
मैं तो बस केवट ही बनना चाहता हूं।
और कहीं क्यों देखूं मैं तेरे सिवा,
तुझ को ही देखूं तू ही तो दर्पण है,
ईश्वर ने जो कुछ दिया है मुझको-
तेरा ही है, तुझको ही अर्पण है।