बुधवार, 24 जून 2020

स्त्री के गहने

 रोजाना की तरह , सुबह सुबह जल्दी उठकर , चाय बना कर  कप ड्राइंग रुम की टेबल पर रखे और बेडरूम में जा कर पत्नि से बोला- उठो इलू इलू गर्ल , उठो चाय तैयार है । पत्नी ने उनिंदी आखों से, हल्की सी मुस्कुराहट लेते हुए मेरी तरफ देखा , लगा जैसे मैंने उगता हुआ सूरज देख लिया हो ।आगे मैंने कहा की आज आज 24 जून है , अपनी शादी की 43 वीं वर्षगांठ , तुम्हें बहुत-बहुत बधाई ।  प्रत्युत्तर में उसने भी मुझे बधाई दी और उठकर चाय पीने आ गई । थोड़ा समय निकला और मैंने दूध और बिस्किट लाकर टेबल पर रखे और पत्नी को आवाज लगाई- बेबी किधर हो ,आ जाओ नाश्ता तैयार हैं । चेहरे पर मुस्कुराहट लिए हुए हम लोगों ने नाश्ता किया । फिर दोपहर में भोजन के समय उसने अतिरिक्त रोटी और लेने के लिए कहा तो मैंने कहा डार्लिंग और कितना खिलाओगी, लोकडाउन चाहे खुल गया है लेकिन अभी बाहर कहीं आ जा नहीं सकते तो पच नहीं पाएगा । फिर तीसरे पहर का समय हो गया और फिर रोजाना की तरह मैंने चाय बनाकर टेबल पर रखी और आवाज लगाई रानी आ जाओ चाय तैयार है । फिर से मुस्कान के साथ हम दोनों ने चाय पी । शाम होते होते मैंने पत्नी को कहा बोलो माय लव तुम्हारे लिए क्या लें सोने की चूड़ियां , कंगन , हार या कुछ और ? तो मेरी और प्यार से देखती हुई बोली कि आप दिन भर में मुझे इतने प्यारे प्यारे संबोधन दे देते हो कि उनके सामने गहने कुछ भी नहीं , मुझे वास्तव में कुछ भी और नहीं चाहिये ।
    गलत कहते हैं लोग  कि स्त्री गहनों की भूखी होती है ,  वास्तव में वह तो प्यार , सम्मान और समर्पण की भूखी होती है ।

मंगलवार, 23 जून 2020

*फूल और कांटे* 

   गुलाब के पौधे में असंख्य कांटे होते हैं , लेकिन फिर भी लोग इसे अपने घर के बगीचे में लगाना चाहते हैं और सर्वाधिक पसंद करते हैं ,आखिर क्यों ? कभी सोचा है आपने ?
  एक होता है बबूल का पेड़ , कोई नहीं चाहता कि एक भी बबूल का पेड़ उसके आंगन में हो,क्योंकि उसमें कांटे ही कांटे होते हैं । मगर दुनिया में आए हैं तो जीना ही पड़ेगा की तर्ज पर ,उनको स्थान मिलता तो है लेकिन न घर में न गांव में और न ही शहर में । इनको जगह मिलती है सिर्फ और सिर्फ जंगल में ।हालांकि बबूल बिल्कुल ही नाकारा भी नहीं होता , पर्यावरण संतुलन में यह बहुत सहायक  होता है लेकिन आम आदमी पर्यावरण के बारे में सोचता ही नहीं और कोई भी इन्हें जंगल से अपने आंगन में लाना नहीं चाहता ।
 दूसरे पायदान पर ऐसे पेड़- पौधे होते हैं जो फूलों से लदे रहते हैं , देखने में बहुत सुंदर लगते हैं , लोगों का मन उन्हें देखकर प्रसन्न होता है । उनमें खुशबू रहे ना रहे , अपने घर के बगीचे में लगाना पसंद करते हैं । ऐसे फूलों की उपस्थिति दिल को सुकून देती है ।
    तीसरे पायदान पर हम बात करते हैं ऐसे पौधे की जिसमें कांटे हैं और फूल भी । आप समझ ही गए होंगे,यह पौधा है गुलाब का । कांटो के होते हुए भी सर्वाधिक लोग इसे पसंद करते हैं और अपने घर के आंगन / बगीचे में लगाना चाहते हैं । किसी आदरणीय को गुलाब के फूलों की माला पहनाना चाहते है। यहां तक कि मंदिर में अर्पण के लिए भी गुलाब के फूल पहली पसंद है । इनकी सुंदरता ही नहीं , साथ में मनभावन खुशबू इसे बनाते हैं पहली पसंद। 
      गुलाब के पौधे की तुलना हम इंसान के गुणों से भी कर सकते हैं। गुलाब के पौधे में  फूल भी हैं और कांटे भी । इसी प्रकार से हर इंसान में  कुछ गुण होते हैं और कुछ अवगुण । गुण अधिक है या अवगुण, यही बात उस व्यक्ति की उपयोगिता निर्धारित करती है ।बबूल के जैसे ही कुछ इंसान होते हैं जिनमें गुण कम और अवगुण ज्यादा होते हैं । ऐसे इंसानों से लोग दूर रहना ही पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि वे किसी भी बात पर उत्तेजित हो सकते हैं और ऐसी बातें कर सकते हैं जो नापसंद होंं और चुभने वाली होंं । हालांकि ऐसे व्यक्ति जहां पर हैं वहां उनकी उपयोगिता होती है । 
   दिखने में सुंदर आकर्षक फूलों वाले पौधे भी होते हैं जिनमें महक नहीं होती। इसी प्रकार मीठी बोली बोलने वाले इंसानों की भी कमी नहीं है जिनके गुण नजर आते हैं लेकिन दुर्गुण छिपे रहते हैं । ऐसे लोगों से , लोग मिलना तो पसंद करेंगे लेकिन हर वक्त मिलेंं ऐसा नहीं चाहेंगे ।
     इंसानों की ऐसी भी प्रजाति होती है जो आकर्षक तो होते ही हैं और गुणों की खान होते हैं उनमें कुछ अवगुण जरूर हो सकते हैं लेकिन उनको छुपाते नहीं , लोग उन्हें चाहते हैं,चाहते हैं कि उनके आसपास बने रहें । जिस तरह गुलाब के फूलों की खुशबू हमें महका देती है,उसी तरह से ऐसे लोगों से हमें प्रेरणा मिलती है, हमारा मन मुस्कुराता है और जीवन महक उठता है ।
    तो फिर देर किस बात की--गुलाब की तरह ही महकिये और मुस्कुराइए। 


स्वरचित--
  सतीश गुप्ता 'पोरवाल' 
 मानसरोवर,जयपुर।