बुधवार, 5 फ़रवरी 2025

नन्ही का स्वागत -- कविता

 भागीरथ जी अति प्रसन्न हैं बढ़ गया जसोरिया परिवार,

अपने ही आंगन में जैसे बस गया अब संसार।

 कमलेश जी भी अति प्रसन्न हैं, खुशियां आईं अपार,

नतमस्तक हो प्रकट कर रहीं ईश्वर को आभार।

अंकित ने अपने संपर्कों को भेज दिये संदेश,

 मुझको जल्दी बताइए जाना है किस देश।

हर्ष और उल्लास से भरपूर हुई है बिन्नी,

उसके अपने कोष में बढ़ गई एक और गिन्नी।

अनुज अब नन्ही को भी खूब खेल खिलायेगा,

 पहले चाचू था अब चाचू चाचू बन अग्रज हो जायेगा।

दीया सोचती अब मैं भी बड़ी कहलाऊंगी,

 पहले मुझे खिलाते थे, अब मैं इसे खिलाऊंगी ।

 नाना का उमड़ रहा नन्ही पर बहुत ही प्यार,

 आते-जाते रहे उसको तो बारंबार निहार।

 नानी भी कम नहीं, है बड़ी ही सयानी,

 बोली नन्ही पर लिखो कविता या कोई कहानी।

मीनू मौसी वीडियो देख-देख खूब हर्षाती है,

मारे खुशी के दे ताली ,ताली खूब बजाती है।

वरुण मौसाजी के चेहरे पर छाई मौन मधुर मुस्कान,

क्या लाऊं मैं ,बता सके तो बता ए भोली नादान।

शिखा मौसी बोली ताली मैं भी खूब बजाती हूं,

 लेकिन ठहरो, उससे मिलने मैं स्वयं ही आ जाती हूं।

केन्या से अरुण मौसाजी कन्या को दे रहे बधाई,

अफ्रीकन लाऊं या भारत की ही लाऊं मिठाई।

तानी इसके सामने कभी नाचेगी और कभी गायेगी, 

या तो बैडमिंटन या फिर भरतनाट्यम नृत्य सिखाएगी।

तनिश ने दीया को तो खूब खिलाया इसे भी खिलायेगा,

 मस्ती क्या होती है, यह इसको भी सिखलायेगा।