गुरुवार, 28 मार्च 2024

जिंदगी में चाहिए - कविता

 साथ चलना‌ है तो भाई जबान पर लगाम,

 और व्यवहार में ठहराव चाहिए।

जिंदगी उलझी है अनगिनत सवालों में,

 मुझे चंद सवालों का जवाब चाहिए।

 रुकावट बनते हैं जो मेरी राह में डराने को,

  उनसे मुझे टकराव चाहिए।

 जीना दुश्वार किया जिस जमाने ने,

 मुझे उस जमाने का बिखराव चाहिए। 

 उन्मुक्त होकर उड़ता फिरुं खुले आसमां में,

 ऐसा मुझे रंगीन ख्वाब चाहिए।

 जिंदगी गुजर गई कांटों पर चलते-चलते,

 अब अंत में अदद एक गुलाब चाहिए।

 बर्फ सी जम गई है यह जिंदगी,

 जिंदगी चलाने को बस एक अलाव चाहिए।

अकेले-अकेले कब तक चलेंगे,

 अब तो कुछ लोगों से मेल मिलाप चाहिए।

आवारा सी चल रही इस जिंदगी को, 

 अब तो कुछ रख-रखाव चाहिए।


Ckkk 

मंगलवार, 26 मार्च 2024

समंदर में -- कविता

दुनिया भर का सब कुछ नजर आता,

 नहीं झांकते अपने अंदर में।

 सात समंदर पार की डींग हांकते,

 खुद समाए किसी समंदर में।

अपने साए में ही हरदम गुम रहते,

 नहीं घुल-मिल जाते किसी मंजर में।

मानव बनकर करते अजीब सी हरकतें,

खुद मानवता ढूंढते बंदर में।

सौ-सौ झूठ बोलते नहीं अघाते,

 हाथों में फूल,निगाहें रहती खंजर में।

 रहना चाहे खुद बाग बगीचे में,

 चाहे डालें दूसरों को बंजर में।


Mskm

रविवार, 17 मार्च 2024

राजा टोडरमल जी-कविता

 धन्य धन्य हो राजा टोडरमल जी,

 ख्याति रहेगी आज और कल भी।

 बूंदी में जिनने जन्म लिया,

 कार्य कुशलता और बुद्धिसे काम लिया।

 राज्य सेवा में पिता ने लगा दिया,

 सुयोग्य कर्मचारी सिद्ध करके दिखा दिया।

 श्रेष्ठ गुण,स्वामी भक्ति, प्रशासन कुशलता भरी हुई,

 प्रसन्न हो शाहजहां ने राय की उपाधि प्रदान करी।

 अपनी बुद्धिमानी से ऐसे ऐसे कार्य किये,

शाहजहां ने खिलअत,घोड़े हाथी प्रदान किये।

उनमें ऐसी विलक्षण बुद्धि थी,

 सदैव राजकोष में राजस्व वृद्धि की।

21वें वर्ष में उनकी बुद्धि ऐसी खिली,

 कि इस वर्ष में उनका राजा की उपाधि मिली।

 परम मित्र धन्नाशाह जब कंगाल हुआ,

 टोडरमलजी के मन में मलाल हुआ।

 अपने धन से कन्या का विवाह किया,

और इस कर्म से दानी नाम कमाया।

 कृतज्ञ है उनके प्रति पोरवाल का जन-जन,

 हृदयके अंतरतल से हम करते उनको नमन।

करते उनको नमन।