रविवार, 17 मार्च 2024

राजा टोडरमल जी-कविता

 धन्य धन्य हो राजा टोडरमल जी,

 ख्याति रहेगी आज और कल भी।

 बूंदी में जिनने जन्म लिया,

 कार्य कुशलता और बुद्धिसे काम लिया।

 राज्य सेवा में पिता ने लगा दिया,

 सुयोग्य कर्मचारी सिद्ध करके दिखा दिया।

 श्रेष्ठ गुण,स्वामी भक्ति, प्रशासन कुशलता भरी हुई,

 प्रसन्न हो शाहजहां ने राय की उपाधि प्रदान करी।

 अपनी बुद्धिमानी से ऐसे ऐसे कार्य किये,

शाहजहां ने खिलअत,घोड़े हाथी प्रदान किये।

उनमें ऐसी विलक्षण बुद्धि थी,

 सदैव राजकोष में राजस्व वृद्धि की।

21वें वर्ष में उनकी बुद्धि ऐसी खिली,

 कि इस वर्ष में उनका राजा की उपाधि मिली।

 परम मित्र धन्नाशाह जब कंगाल हुआ,

 टोडरमलजी के मन में मलाल हुआ।

 अपने धन से कन्या का विवाह किया,

और इस कर्म से दानी नाम कमाया।

 कृतज्ञ है उनके प्रति पोरवाल का जन-जन,

 हृदयके अंतरतल से हम करते उनको नमन।

करते उनको नमन।

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