साथ चलना है तो भाई जबान पर लगाम,
और व्यवहार में ठहराव चाहिए।
जिंदगी उलझी है अनगिनत सवालों में,
मुझे चंद सवालों का जवाब चाहिए।
रुकावट बनते हैं जो मेरी राह में डराने को,
उनसे मुझे टकराव चाहिए।
जीना दुश्वार किया जिस जमाने ने,
मुझे उस जमाने का बिखराव चाहिए।
उन्मुक्त होकर उड़ता फिरुं खुले आसमां में,
ऐसा मुझे रंगीन ख्वाब चाहिए।
जिंदगी गुजर गई कांटों पर चलते-चलते,
अब अंत में अदद एक गुलाब चाहिए।
बर्फ सी जम गई है यह जिंदगी,
जिंदगी चलाने को बस एक अलाव चाहिए।
अकेले-अकेले कब तक चलेंगे,
अब तो कुछ लोगों से मेल मिलाप चाहिए।
आवारा सी चल रही इस जिंदगी को,
अब तो कुछ रख-रखाव चाहिए।
Ckkk
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