बुधवार, 8 अप्रैल 2026

मौसम सी फितरत -- गीत

 अपनी बात पर अडिग रहना नहीं सीखा तुमने, 

मौसम की तरह बदल जाना तुम्हारी फितरत क्यों है।


तुम्हारी बातों के जाल से घिर गया था मैं,

तुम्हारे हुस्न के जलवे से घिर गया था मैं।

क्या बताऊं आखिर मुझे तुम्हारी जरूरत क्यों है,

मौसम की तरह बदल जाना तुम्हारी फितरत क्यों है। 


जिसने भी तराशा तुझे क्या खूब रहा होगा,

फूलों की सुंदर वादियों में घूम रहा होगा। 

 पत्थर की नहीं तू संगमरमर की मूरत क्यों है,  

मौसम की तरह बदल जाना तेरी फितरत क्यों है।


सुंदरता का तो में पुजारी हरगिज नहीं,

इधर-उधर भटकता रहे ऐसा मेरा दिल नहीं। 

मेरे दिल में समा गई तू ऐसी मूरत क्यों है,

 मौसम की तरह बदल जाना तेरी फितरत क्यों है।


Mssa

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

नानी का घर - बाल कविता

 #नमन मंच 

#काव्यांगन 

#बाल चौपाल

 #नानी का घर

दिनांक : 2 अप्रैल 2026 


अब क्यों जाएंगे हम इधर-उधर,

 जब सबसे प्यारा है नानी का घर। 


 हम वहां पर दूध-मलाई नहीं खाते हैं,

नाना से कहकर नाना चीजें मंगवाते हैं।


अजब सा जादू होता है नानी के प्यार में,

जैसे बनिये को होता है मूल के ब्याज में।


नाना-नानी, संग-संग ऐसे हिल मिल जाते, 

खेलकूद ही नहीं संस्कारों का भी पाठ पढ़ाते।


नाना की बातें होतीं बड़ी सुहानी,

 रोज सुनाते हमें नई-नई कहानी।


सुबह नौ- नौ बजे हम बिस्तर से उठते,

नानी की जब डांट पड़े, तभी कुछ करते।


उठते-उठते भी हम करते थोड़ी सी किटकिट,

तभी नानी लेकर आ जाती दूध और बिस्किट।


नाना-नानी की बातों से दूर होता डर हमारा,

सारे जहां से अच्छा नाना-नानी का घर हमारा।


स्वरचित एवं मौलिक- सतीश गुप्ता पोरवाल, जयपुर