गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

नानी का घर - बाल कविता

 #नमन मंच 

#काव्यांगन 

#बाल चौपाल

 #नानी का घर

दिनांक : 2 अप्रैल 2026 


अब क्यों जाएंगे हम इधर-उधर,

 जब सबसे प्यारा है नानी का घर। 


 हम वहां पर दूध-मलाई नहीं खाते हैं,

नाना से कहकर नाना चीजें मंगवाते हैं।


अजब सा जादू होता है नानी के प्यार में,

जैसे बनिये को होता है मूल के ब्याज में।


नाना-नानी, संग-संग ऐसे हिल मिल जाते, 

खेलकूद ही नहीं संस्कारों का भी पाठ पढ़ाते।


नाना की बातें होतीं बड़ी सुहानी,

 रोज सुनाते हमें नई-नई कहानी।


सुबह नौ- नौ बजे हम बिस्तर से उठते,

नानी की जब डांट पड़े, तभी कुछ करते।


उठते-उठते भी हम करते थोड़ी सी किटकिट,

तभी नानी लेकर आ जाती दूध और बिस्किट।


नाना-नानी की बातों से दूर होता डर हमारा,

सारे जहां से अच्छा नाना-नानी का घर हमारा।


स्वरचित एवं मौलिक- सतीश गुप्ता पोरवाल, जयपुर

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