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#बाल चौपाल
#नानी का घर
दिनांक : 2 अप्रैल 2026
अब क्यों जाएंगे हम इधर-उधर,
जब सबसे प्यारा है नानी का घर।
हम वहां पर दूध-मलाई नहीं खाते हैं,
नाना से कहकर नाना चीजें मंगवाते हैं।
अजब सा जादू होता है नानी के प्यार में,
जैसे बनिये को होता है मूल के ब्याज में।
नाना-नानी, संग-संग ऐसे हिल मिल जाते,
खेलकूद ही नहीं संस्कारों का भी पाठ पढ़ाते।
नाना की बातें होतीं बड़ी सुहानी,
रोज सुनाते हमें नई-नई कहानी।
सुबह नौ- नौ बजे हम बिस्तर से उठते,
नानी की जब डांट पड़े, तभी कुछ करते।
उठते-उठते भी हम करते थोड़ी सी किटकिट,
तभी नानी लेकर आ जाती दूध और बिस्किट।
नाना-नानी की बातों से दूर होता डर हमारा,
सारे जहां से अच्छा नाना-नानी का घर हमारा।
स्वरचित एवं मौलिक- सतीश गुप्ता पोरवाल, जयपुर
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