😀भगतराम का भविष्य फल 😀
भगतराम जी कर चुके थे बी ए पास,
घूम रहे थे नौकरी की दिल में लेकर आस।
चाह रहे थे होना अफसर पर थी लाचारी ,
किस्मत पर लौट रही थी बेकारी ही बेकारी ।
तभी अचानक एक ज्योतिषी दिख आया,
देख भगतराम ने उसको अपना भाग्य आजमाया ।
पूछा, बोलो होगी कैसे मेरी नैया पार,
या पड़ा रहूंगा मैं तो यूं ही बेकार।
देखी चट से ज्योतिषी ने हाथ की रेखाएं ,
बोला तुझे भाग्य से है बड़ी-बड़ी आशाएं ।
आई है क्यों मुख पर तेरे निराशा घोर,
होंगी बस ट्रक औ कारें तेरे चारों ओर ।
यह सुनकर भगत राम जी अति ही हर्षाये ,
निकाल जेब से रुपए दस भेंट तुरंत कर आये ।
सोचा उसने, कितना खुश नसीब मैं हो जाऊंगा ,
बस ट्रक औ कारों का मालिक बन जाऊंगा ।
मिली नौकरी भगतराम को खत्म हुई निराशा ,
पर वह इससे रख सकता था रोटी की ही आशा।
एक रोज फिर उसे वही ज्योतिषी दिख आया,
दौड़ तुरंत ही वह उसके पास आया ।
बोला सोचा था मैंने सैर करूंगा कारों पर ,
पर ट्रैफिक कंट्रोल कर रहा मैं चौराहों पर ।
ज्योतिषी था तेज बोल उठा जल्दी से,
तू सोच रहा है बता दिया था तुझे गलती से ।
सुन चौराहे पर ड्यूटी जब तेरी रहती है ,
तब क्या बस,ट्रक ,कारें चारों ओर नहीं रहती है
😀😀😀😀😀😀😀
भगतराम जी कर चुके थे बी ए पास,
घूम रहे थे नौकरी की दिल में लेकर आस।
चाह रहे थे होना अफसर पर थी लाचारी ,
किस्मत पर लौट रही थी बेकारी ही बेकारी ।
तभी अचानक एक ज्योतिषी दिख आया,
देख भगतराम ने उसको अपना भाग्य आजमाया ।
पूछा, बोलो होगी कैसे मेरी नैया पार,
या पड़ा रहूंगा मैं तो यूं ही बेकार।
देखी चट से ज्योतिषी ने हाथ की रेखाएं ,
बोला तुझे भाग्य से है बड़ी-बड़ी आशाएं ।
आई है क्यों मुख पर तेरे निराशा घोर,
होंगी बस ट्रक औ कारें तेरे चारों ओर ।
यह सुनकर भगत राम जी अति ही हर्षाये ,
निकाल जेब से रुपए दस भेंट तुरंत कर आये ।
सोचा उसने, कितना खुश नसीब मैं हो जाऊंगा ,
बस ट्रक औ कारों का मालिक बन जाऊंगा ।
मिली नौकरी भगतराम को खत्म हुई निराशा ,
पर वह इससे रख सकता था रोटी की ही आशा।
एक रोज फिर उसे वही ज्योतिषी दिख आया,
दौड़ तुरंत ही वह उसके पास आया ।
बोला सोचा था मैंने सैर करूंगा कारों पर ,
पर ट्रैफिक कंट्रोल कर रहा मैं चौराहों पर ।
ज्योतिषी था तेज बोल उठा जल्दी से,
तू सोच रहा है बता दिया था तुझे गलती से ।
सुन चौराहे पर ड्यूटी जब तेरी रहती है ,
तब क्या बस,ट्रक ,कारें चारों ओर नहीं रहती है
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