सोमवार, 27 नवंबर 2023

मस्ती का संदेश- कविता

 मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूं,

मैं मादकता नि:शेष लिए फिरता हूं,

जिसे सुनकर जग झूमे, झुके,लहराये,

   मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 हिमालय से ऊंची मेरी आशाएं,

 समंदर से गहरी मेरी कल्पनाएं ,

मैं नित नए सपने संजोता हूं,

 मैं मस्ती का संदेश लिए  फिरता हूं।

 दुख का सागर न लहराए,

कष्ट का कांटा न चुभ जाए,

बातों से अपनी सबके दुख हरता हूं, 

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 किंचित भी लगे आघात क्यों,

 कुंठित हो किसी के जज्बात क्यों,

 अरमानों के फूल खिलाता हूं 

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं। 

न समझो कि तुम चुक गए हो, 

न वो दिया हो जो बुझ गए हो,

 सबके दिलों में प्रकाश फैलाता हूं,

मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 सीने में जलन,आंखों में चुभन,

 दिल में हो अगन पर रहूं मगन,

अमावस से बादल जब छा जाएं,

घुप्प अंधेरे में दीपक जलाए रहता हूं।

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

Ckkk  - हरिवंश राय बच्चन 

सात और सात फेरे- लघु कथा

 एक से एक लड़कियों की कुंडलियां आने लगी थीं पर उन्होंने अपने विलायती पुत्र के लिए एकदम ही देसी कन्या ढूंढ कर वाग्दान कर दिया।दरअसल एक घटनाक्रम के अंतर्गत ऐसा हुआ

 कांतानाथ जी का बेटा मधुर विलायत में एक अच्छी नौकरी कर रहा था। मधुर के पिताजी कांतानाथ जी एवं माताजी को उसके विवाह की चिंता थी तो उन्होंने समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया और कन्याओं के प्रस्ताव और कुंडलियों के ढ़ेर लग गए। जब मधुर कुछ छुट्टियां लेकर भारत आया तो ये सब प्रस्ताव उसे दिखाए गए उनमें से मधुर को वही लड़की पसंद आई जो उसके माता-पिता को भी पसंद आई थी, कद-काठी अच्छी थी सुंदरता में कोई कमी नहीं और पहने लिबास से उसे लगा कि वह विलायत में उसके साथ बराबरी की रहेगी । रात्रि को वह मोबाइल देखते हुए अकेले ही कल्पना में उसके साथ  फेरे लगाने लगा। सातवां फेर पूरा हुआ ही था कि उसको एक रील नजर आई जिसमें वह अश्लील दृश्य प्रस्तुत कर रही थी।  उसकी कुछ और रील देखकर उसका सिर चकरा गया। सुबह पिताजी को यह बात बताई तो उन्होंने सोचा कि पढ़ाई लिखाई रहन-सहन और लिबास पर जाने के बजाय सुसंस्कृत लड़की ही ठीक रहेगी।पड़ोस में ही ऐसी लड़की पर उनकी निगाह गई और बातचीत कर संबंध पक्का कर दिया गया।आनन-फानन में तीसरे दिन पंडित जी को बुलाकर शगुन करवा दिया गया।मधुर मन ही मन सोचने लगा ,सात फेरे उसने मन ही मन ले लिए थे लेकिन यथार्थ में तो अब होने वाले सात फेरे ही महत्वपूर्ण होंगे। 

Ckkk

रविवार, 12 नवंबर 2023

भजन - तेरे चरणों में

 तेरे चरणों में मां मेरा धाम है,

 हृदय में बसा तेरा नाम है।

 हम तो थे माटी के पुतले,

 तूने ही डाली इसमें जान है,

तेरे चरणों में मां मेरा धाम है।

दुनिया में आकर के और क्या करना,

अब तो हरदम जपना तेरा नाम है,

तेरे चरणों में मां मेरा धाम है।

समय के फेरे में मुझे नहीं पड़ना,

अब तो तू ही सुबह तू ही शाम है,

तेरे चरणों में मां मेरा धाम है।

तेरी करूं मैं सुबह शाम पूजा,

अब तो मेरा बस यही काम है,

 तेरे चरणों में मां मेरा धाम है।

 मेरी आंखों को तू ही नजर आए,

तू ही जमीं तू ही आसमान है,

तेरे चरणों में मां मेरा धाम है।