सोमवार, 27 नवंबर 2023

मस्ती का संदेश- कविता

 मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूं,

मैं मादकता नि:शेष लिए फिरता हूं,

जिसे सुनकर जग झूमे, झुके,लहराये,

   मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 हिमालय से ऊंची मेरी आशाएं,

 समंदर से गहरी मेरी कल्पनाएं ,

मैं नित नए सपने संजोता हूं,

 मैं मस्ती का संदेश लिए  फिरता हूं।

 दुख का सागर न लहराए,

कष्ट का कांटा न चुभ जाए,

बातों से अपनी सबके दुख हरता हूं, 

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 किंचित भी लगे आघात क्यों,

 कुंठित हो किसी के जज्बात क्यों,

 अरमानों के फूल खिलाता हूं 

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं। 

न समझो कि तुम चुक गए हो, 

न वो दिया हो जो बुझ गए हो,

 सबके दिलों में प्रकाश फैलाता हूं,

मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

 सीने में जलन,आंखों में चुभन,

 दिल में हो अगन पर रहूं मगन,

अमावस से बादल जब छा जाएं,

घुप्प अंधेरे में दीपक जलाए रहता हूं।

 मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं।

Ckkk  - हरिवंश राय बच्चन 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें