गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

हासिल ना हुआ -- कविता

 जो हासिल न हो सका ,आखिर उसका मलाल क्यों करें,

हम खुद अपने आप में सिमट जाएं, ऐसा हाल क्यों करें।

 तमन्ना तो हर किसी की होती है बहुत कुछ पाने की,

  ना मिले तो जरूरत है अपने आप को समझाने की। 

मुसाफिर को जाना कहीं है लेकिन कहीं और जाएंगे,

 इस तरह भटकेंगे तो आखिर मंजिल को कैसे पाएंगे।

कुछ लोग कहते हैं कि क्या करें किस्मत में नहीं था, 

लेकिन सच तो यह है कि जितना करना था किया नहीं था।

मौसम आते हैं, जाते हैं और फिर लौट कर आते हैं,

सूरज और चंदा रात को दिन, दिन को रात बनाते हैं।

समय कभी भी स्थाई रूप से कहीं नहीं जाता है,

जो कर्म करता है उसका फल अवश्य ही पाता है।

जो यह सोचते हैं कि यह तो हमें हासिल नहीं होगा,

 तो मानिए कि वह हासिल करने के काबिल नहीं होगा।


Mssa


सोमवार, 16 दिसंबर 2024

तराने बहुत हैं -- कविता

 तराने बहुत हैं, गुनगुनाने की चाहत तो हो,

सरगम बसी हो दिल में, तो कोई राहत तो हो।

गमों की पोटली तले जब दिल हो जाए बोझिल, 

छेड़ दो जो कोई तराना, तो खुश हो जाए दिल।

हर रोज जो दिन होता है तो रात भी तो होगी ही,

खुशी की ही क्यों, गम की भी बात तो होगी ही।

खुशहाल जो हो जिंदगी,तो लुटा दो खुशी का खजाना,

आज ही जी लो जी भर के,कल को किसने जाना।

सपने जो देखो तो उन्हें पिरोकर एक कहानी बना दो,

मुस्कुराती,खिलखिलाती सी खुशनुमा जिंदगानी बना दो।

जिंदगी में जिंदगी जीने को,एक नहीं, कई कई बहाने हैं,

दिल में जो गुनगुनाने की चाहत हो,तो कई कई तराने हैं।


Mssa 

मेरा दर्द -- कविता

 बेदर्द अपने,बेदर्द पराए, यहां बेदर्द है हर कोई,

 हर कोई अपना दर्द जाने ,मेरा दर्द न जाने कोई।

कितने कांटे हैं मेरी राहों में, यह कोई न जाने,

 मैं कितना ही जताऊं जमाने को,कोई न माने। 

प्रबल हो उठती हैं मेरी भी इच्छाएं, कभी-कभी 

चाहता हूं कुछ तो पूरी हो‌ जाएं,अभी बस अभी।

ये इच्छाएं या अभिलाषाएं कुछ सिमटती हुईं,

 चाहती नहीं छोड़ना, रहती हैं मुझसे लिपटती हुईं।

 समंदर की लहरों की मानिंद दुख आते हैं जाते नहीं,

 मेरे ही घर में क्यों, दूसरों के घर में डेरा जमाते नहीं।

क्या इनका मेरे ऊपर, पिछले जन्म का कोई कर्ज है,

 इसीलिए क्या मुझको सताना इनका एकमात्र फर्ज है। 

 अब तो दिल को समझाता हूं यही दर्द तेरे भाग्य में है,

 नहीं कोई मात्रा,भार,मापनी तुम्हारे अपने काव्य में है।