शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

 चुरा लूं क्या ,फलक से कुछ सितारों को,

 इन बहारों में सिमटी हुई कुछ फिजाओं को।

मस्ती में झूमती गाती नाच रही हैं जो,

बाहों में भर लूं क्या ,इन हवाओं को।


शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025

श्रीराम का आगमन - कविता

 यह कैसी शुभ घड़ी आज आई है, 

 सबके दिलों में उमंग भर आई है।

अति व्यग्रता से सब प्रतीक्षा कर रहे हैं,

अति शीघ्र पधारेंगे राम अपेक्षा कर रहे हैं।

हंस भी पंख फैला कर मधुर ध्वनि कर रहे हैं,

अति प्रसन्न हो सरोवर में जल विहार कर रहे हैं।

चिड़ियों की चहचहाहट अलग ही रंग भर रही है,

अन्य पक्षियों की स्वर लहरी भी संग चल रही है।

बागों में बहार है,वृक्षों के तने और भी तन गये हैं, 

पत्तियों संग डालियों के झूमने को मन बन गए हैं।

अयोध्या वासियों के मन खुशी से झूम रहे हैं,

एक दूसरे से बतियाते पूरे गांव में घूम रहे हैं।

घर आंगन अब खूब सजाये जाएंगे,

ढोल नगाड़े भी खूब बजाये जाएंगे।

स्वागत द्वारों से श्री राम जी का आगमन होगा,

अयोध्या प्रवेश से प्रफुल्लित उनका मन‌ होगा। 

बिना शोर-शराबे आखिर कैसे मने कोई त्यौहार, 

शोरगर भी व्यस्त हो गए हैं करने को पटाखे तैयार।

दीपमालिकाओं से हर घर आज प्रकाशवान होगा, 

अयोध्या तो आज जैसे तारों से सजा आसमान होगा। 

अब श्रीराम जी का राज होगा,हर समस्या का समाधान होगा, 

 लक्ष्मी माता धन-धान्य से भरपूर रखे,ऐसा आव्हान होगा। 

जैसे ही लक्ष्मण जी और सीता जी संग श्रीराम जी पधारेंगे, 

 झूमेंगे,नाचेंगे और दीपों के संग आज दीपावली मनाएंगे।