मंगलवार, 12 जुलाई 2022

खता हो गई(दिल की बात)

*खता हो गई*


दिल की बात दिल में ही रखूं, 

 या फिर किसी को तो कहूं।

 बता दी तो कहीं फ़साना न बन जाये,

 मेरी इस बात पर ज़माना ना हंस जाये।

 चलो अब मैं खोलता हूं अपने दिल की डायरी,

 हो सकता है बन जाये यह एक खूबसूरत शायरी।

  दिल ही दिल में चाहने लगे हम,

खत लिखा तो खता हो गई ।

छुपाई थी जो बात हमने ,

 अब उसे पता हो गई ।

 दे दिया था हमारा दिल जिसे,

 जाने क्यों हमसे खफा हो गई ।

अब कैसे करें वफा उससे, 

 जो खुद ही बेवफा हो गई ।



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