सोमवार, 1 अगस्त 2022

मुक्तक


नसीब ही तो नहीं है वरना हम क्या होते,

  फेसबुक के हर पेज पर हम बयां होते,

 कलम उठाते हैं लिखने को पर लिख नहीं पाते,

  वरना हम उम्र से बुजुर्ग और दिल से जवां होते।

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  न जाने क्यों हमें तुम्हारी याद आती है,

  जमीं से आसमांं तक यही फरियाद आती है,

  चले आओ अब तो सभी फासले मिटा कर,

   अब तो रोज कयामत की रात आती है।

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फूल चमन में खिल गये,

   पर ख्वाब अधूरे रह गये,

   उसने कहा था आने को,

   पर हम राह तकते रह गये।

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यह दिल तो ,

हरदम न रोता ,

जो हमदम न होता,

तो गम भी न होता।

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सिर्फ वादा करना ही काफी नहीं प्यार में,

  वादा करके न मुकरना जरूरी है।

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चोटिल तो मुझे भी करते हैं लोग,

 पर मैं आह नहीं भरता ।

चोट पर नश्तर घुमाने से,

 घाव नहीं भरता।

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मजा नहीं आता लोगों को,

 अपने को आबाद करने में ।

 मजा तो आता है उन्हे,

  दूसरों को बर्बाद करने में । 

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 मुझे जगा कर खुद सो रही हो ,

 जाने किन सपनों में खो रही हो,  

मैं तो बढ़ रहा था बड़े ही जोश से,

  क्यों राह में कांटे बो रही हो ।

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कर्ज़ दूध का मां के तुम चुका न पाओगे,

 मिली है रोशनी मां से बुझा न पाओगे।

 बहुत कुछ पाकर जीवन में चाहे तुम तन जाओ,

  सामने अपने कभी मां को झुका न पाओगे।

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खुशी खुशी , खुशी का इंतजार करो ,

 आएगी जरूर  न अपने को  बेजार करो ।

 दुखी रहने को अपनी फितरत न बनाओ,

  खुशी को अपनी जिंदगी में शुमार करो। 


मेरी दुआ दवा से भी ज्यादा असर करती है,

और बद्दुआ जिसे लगे,समझो जहर बनती है।

 वैसे तो मैं हूं एक अदद इंसान ही,

 लेकिन मेरे अंदर पवित्र आत्मा बसर करती है।


आओ आज हम तुम मिलें, 

और एक कप कॉफी पी लें, 

गिले शिकवे जो भी हों,

 भूल जाएं चैन से जी लें। 





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