गुरुवार, 25 अगस्त 2022

राह मुश्किल है या हमारे कदम

 

#राह मुश्किल है या हमारे कदम #

 रचयिता:सतीश गुप्ता'पोरवाल'

हम तो चले थे अपनी ही राह पर

 मंजिल का तो पता ही नहीं था। 

कोई तो मंजिल मिलेगी भी या नहीं

 इस बात का डर सता रहा था।

  सहमे सहमे से उठ रहे थे कदम

  हम बढ़ते जा रहे थे राह में।

  हां उठ रहे थे कदम 

 मंजिल तक पहुंचने की चाह में।

  चल रहे थे हम अपनी ही धुन में

   दिलो-दिमाग में विचार था तुम्हारा।

  हम क्या अधर में ही रह जाएंगे

 या लक्ष्य पूरा होगा हमारा ।

 कदम तो थे बढ़ने को बेताब 

 राह में अवरोध थे तुम्हारे ख्वाब।

 लेकिन क्या लक्ष्य पूरा होगा

 यह डर पल-पल सता रहा था।

यही डर तो कोशिश में था

  रोकने को हमारे कदम।

 अब तुम ही बताओ सनम 

राह मुश्किल है या हमारे कदम।

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