दर्द ऐसा था जो लिखा न जा सका,
बेदर्दी दुनिया को बताया न जा सका।
दर्द हमारा था हमें ही झेलना था,
दुनिया को बताते तो उसे तो खेलना था।
जाने क्या सोच रखा था ऊपर वाले ने,
तकदीर ही ऐसी बनाई थी उस रखवाले ने।
खुशी तो दे दी थी हजारों नहीं लाखों को,
दर्द भरे आंसू ही दे दिए मेरी आंखों को।
अब तो तकदीर से भी संघर्ष करना होगा,
दर्द के गम को खुशी में बदलना होगा।
तभी मेरा दिल खुशी में झूम कर मगन होगा,
यह समझ लो कि बादलों से घिरा हुआ गगन होगा।
Kalkkj
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