शुक्रवार, 9 जून 2023

काला धन- कविता

 काला काला काला काला 
 काला रंग सब से मतवाला 
काला हो या गोरा हो
 काले ने सबको रंग डाला 
गोरे गोरे गाल हों 
सिर पर हों काले केश, 
 काले धन वाले का तो भैया,
 सबसे ज्यादा है ऐश। 
काले कपड़े काला चश्मा 
और काली हो कार
 ऐसे लोगों को तो 
 बाकी रंग लगे बेकार
 सांवली सूरत लगे प्यारी 
सांवली मूरत पर जाएं बलिहारी 
सीधे सीधे जो आ जाता 
वह पत्नी जैसा लगता
 ऊपर से जो आता 
वह तो प्रेयसी जैसा भाता 
मन हो जाये जब काला
 काला धन लगे सुरा का प्याला
 काला धन पाने को जाल बुनते 
आ जाये तब दीवारों में चुनते
 काला धन जब हद से ज्यादा बढ़ जाता
 देश में नहीं स्विस बैंक में खाता खुल जाता
 एक दिन तो ऐसा आता
 जब छापा पड़ जाता
 मुँह छिपाते फिरते 
 तब गोरा मुँह भी काला हो जाता। 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें