मुस्कराकर.... मिला करो....
यह क्या आते ही चल दिए, कुछ देर तो रुका करो यारों,
कुछ देर रुक कर,मुस्कुराकर, दिल से मिला करो यारों।
कुछ तो बात थी तुममें जो हर किसी में नहीं,
हमें आकृष्ट कर ले यह बात हर किसी में नहीं।
हम तो थे अपने आप में ही मस्त रहने वाले
अपने काम से काम और काम में व्यस्त रहने वाले।
दोस्ती क्या है यह हम कल तक नहीं जानते थे,
खून के रिश्ते के अलावा और किसी को नहीं मानते थे।
क्या मालूम था एक दिन कोई ऐसा मिल जाएगा,
यह निर्मोही दिल मेरा तुमसे मिलकर खिल जाएगा।
जब भी मिलो,सिर्फ हाय-हेलो ना किया करो,
थोड़ा रुको और फिर मुस्कुरा कर मिला करो।
Mssa/dainik
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