बुधवार, 14 जून 2023

कभी तुम नहीं - कविता

 कभी तुम नहीं कभी हम नहीं कहते,

 बस हौले से मुस्कुराते और चुप रहते।

 परिस्तिथिय कुछ ऐसी आ ही जाती हैं,

 लेकिन कुछ तुम सहते कुछ हम सहते। 

लोग उलझायेंगे हम तो आपस में ही समझ लेंगे,

 दुनिया थक जाएगी कोशिश करते करते। 

कौन कहता है कि दूरियां हैं हम दोनों के बीच 

 हम तो दोनों ही एक दूसरे के दिलों में बसते।

भूल जाएं जो भी गम अब तक सहे हैं हमने, 

 चलो मिलकर अब नई दुनियां हैं रचते। 

एक ऐसा दौर आ ही जाता है जिंदगी में,

 इसमें तुम न उलझो हम भी नहीं उलझते।


Mssa/ dainik

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