शुक्रवार, 2 जून 2023

चलता चल राही-- कविता

कोई भी समस्या नहीं है भारी,

गर समझो इसको जो जिम्मेदारी।

सुलझा न सको तो मुझको दे दो,

सुलझाने की अब मेरी है बारी।


कोई भी बाधा हो,कर देंगे नाकाम, 

मंजिल तक जाना है, करेंगे अपना नाम।

आगे कदम बढ़ायेंगे,बस चलते ही जायेंगे,

बस यूं ही कट जायेगा सफर। 

हौसला हो जब मन में मुश्किल हो आसान,

काम करेंगे कुछ ऐसा जग में हो जाये नाम।

नहीं किसी से डरना है, नहीं राह में रुकना है,

बस यूं ही कट जायेगा सफर।।


  चलता चल राही, तू चलता चल,

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,तू चलता चल--

आंधियों की तू परवाह न कर,

 बाधाएं आ जाएं तो आह न कर,

 निर्बाध गति से चलता चल, 

 चलता चल राही, तू चलता चल,

चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,तू चलता चल--

चाहे मंजिल तक पहुंचना लगे अनिश्चित,

 घबराना न तू कभी भी किंचित, 

 दृढ़ निश्चय से चलता चल, 

 चलता चल राही, तू चलता चल। 

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही तू चलता चल--

मंज़िल लगे पर्वत सी ऊंची,  

  या कभी सागर सी नीची,

  ऊंच नीच से परे चलता चल,

चलता चल राही,तू चलता चल।

 चाहे सूरज पहुंचे अस्ताचल,

 चलता चल राही,चलता चल। 

 


Mssa / rssa

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