यामिनी डाइनिंग टेबल पर बैठी हुई रितेश का इंतजार कर रही थी। 'डिनर' का समय था और रितेश था कि 'ऑफिस' की किसी 'फाइल' में उलझा हुआ था। यामिनी सोच रही थी कि रितेश आए तो 'किचन' से भोजन लेकर आए और 'डिनर' करके , बाकी कार्य निपटा कर सोने की तैयारी करे । सहसा घर की 'लाइट' 'चली' गई लेकिन वहां पूर्ण रूप से अंधेरा नहीं हुआ। ऐसा लग रहा था जैसे वहां कोई 'नाइट लैंप' जल रहा हो । यामिनी ने पीछे मुड़ कर, खिड़की की तरफ देखा तो पूनम का चांद नजर आया। बाहर बगीचे में फूलों के पौधों में विशेष चमक आ रही थी। वह सोचने लगी कि यह चांदनी का ही असर है, चांद की चांदनी कितनी शीतल और सुंदरता प्रदान करने वाली होती है । रितेश अपना काम निपटा कर वहां पहुंचा और यामिनी का चेहरा देखा तो देखता ही रह गया। उसके चेहरे पर चाँदनी की वज़ह से अलग ही चमक आ गई थी । उसने यामिनी को कहा "देखो आज तुम्हारा चेहरा वैसा ही लग रहा है जैसे कुछ वर्षों पूर्व था। मालूम नहीं क्यों तुम्हारे चेहरे की चमक फीकी हो गई। यामिनी ने कहा "घर की जिम्मेदारी और बच्चों की परवरिश ज्यादा जरूरी है ,चेहरे की चमक से ।अब बच्चे बड़े हो चुके हैं , घर की जिम्मेदारी भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है तो देखना मेरे चेहरे की चमक तुम्हें ऐसी ही और वैसी ही देखने को मिलेगी जैसे पहले थी। दोनों के चेहरों पर हल्की सी मुस्कुराहट तैर गई।
MSA (wa)
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