शनिवार, 6 मई 2023

महाराणा प्रताप-- कविता

 महाराणा प्रताप  के आगे हम अपना सर झुकाते हैं, 

उस प्रतापी राजा की कहानी तुम्हें सुनाते हैं। 

परदेेश में भी जिसके नाम का डंका बजता था, 

आगे जिसके अच्छे-अच्छों का सर झुकता था।

 नाम के जिससे थर-थर कांपे दुश्मन हर दिशा में, 

चैन न आए दिन में नींद न आए निशा में। 

वीरों की धरती की गाथा हर एक की जुबानी,  

 कह रही महाराणा की वीरता की कहानी। 

 जिस दुश्मन ने भी देखा वो प्रतापी भाला, 

 उसके गले में अटका निवाला। 

याद है हमें वह युद्ध हल्दीघाटी का,

आभारी जिसका कण-कण इस देश की माटी का। 

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