शनिवार, 6 मई 2023

सुख-दुःख- कविता

 किस-किस पर भरोसा करें जनाब ,

देखिए ग्रीष्म ऋतु का बदला मिजाज।

 क्या बताएं इस मौसम की तो क्या बात है,

 कभी गर्मी ,कभी सर्दी, कभी बरसात है।

 जीवन में कभी सुख और कभी दुख आ ही जाता है,

 न सुख में हंसो न दुख में डरो यह पाठ पढ़ा जाता है। 

 हौसला रखकर इंसान पग पग आगे बढ़ता है, 

इसी हौसले से दुख घट और सुख बढ़ जाता है।

 हर इंसान करता है सुखों की ही कामना, 

 पर करना ही पड़ता है दुखों से भी सामना।

 मौसम का तो चाहे कितना ही बदल जाए मिजाज,

 पर इंसान चाहे तो  रख सकता है सुखों का हिसाब। 

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