कामिनी और बृजेश न केवल पड़ोसी थे बल्कि दोनों एक ही स्कूल और एक ही क्लास में पढ़ते थे। दोनों साथ जाते और स्कूल से वापस ही साथी आते । शाम को, और बच्चों के साथ कुछ समय के लिए खेलते । वर्ष बीतते गए और बृजेश के पिताजी का तबादला दूसरे शहर में हो गया। इस तरह दोनों के कॉलेज बदल गए थे। कॉलेज की शिक्षा के बाद दोनों की नौकरी एक ही शहर में लग गई और अचानक एक दिन,इन दोनों की मुलाकात हुई । पुरानी निकटता धीरे-धीरे प्यार में बदलती गई। दोनों घंटों बातें करते रहते , यहां वहां घूमते हुए प्यार में डूबते गए। एक दिन अचानक कामिनी का एक्सीडेंट हुआ जिसमें उसका एक पैर बुरी तरह से घायल हो गया और अंत में उसके पैर को काटना ही पड़ा। बृजेश उससे मिलता और अल्प समय में ही वापस चला जाता। धीरे-धीरे बृजेश कामिनी से दूरी बनाने लगा। कामिनी को बुरा लगता था और वह उसे उलाहना देती लेकिन बृजेश था कि दूरी लगातार बढ़ाता रहा ।
बृजेश को कामिनी से मिले हुए लगभग एक महीना हो गया था। अचानक एक दिन,एक शोरूम में कामिनी ने देखा कि वहां बृजेश भी मौजूद है। वह बृजेश के पास गई और उसको बोला कि आखिर वह उससे दूर क्यों होता जा रहा है ? क्या मेरे प्यार में कमी आ गई है ? बृजेश कुछ देर चुप रहा फिर बोला कि मेरा संबंध एक अच्छी लड़की से हो गया है और अगले माह उससे शादी की वज़ह से मैं व्यस्त हूं।
कामिनी को ऐसी आशा नहीं थी । वह फट पड़ी "मैं समझती हूं जब से मेरा पैर कटा है, तुम मुझसे दूर होते गए। क्या ऐसा ही प्यार किया था तुमने मुझसे ? प्यार वह होता है जो मजबूरी में भी सहारा बने। लेकिन ऐसे समय में , ऐसी स्थिति में तुमने दूर होना ही ठीक समझा। बृजेश , मैं जान गई हूं तुम्हें मुझसे सच्चा प्यार नहीं था । वास्तव में कच्चा प्यार था। जो इधर से उधर झुक जाए उसे सच्चा प्यार नहीं कहा जा सकता, इसे कच्चा प्यार ही कहा जाएग। ठीक है तुम नहीं मिलोगे तो क्या , मैं अपना जीवन अपने हिसाब से जी लूंगी। कामिनी दृढ़ निश्चय के साथ वहां से चल दी।
Mskm
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