शनिवार, 27 मई 2023

आज़मा लो-- कविता

 ग़र घर नहीं है काफी तो सारा जहां लो,

यह जमीं ही नहीं, चाहो तो आसमां लो। 

यकीं करो मेरी बातों का ए जानेमन,

 बस एक बार तो मुझे, मौत से पहले आज़मा  लो। 

समंदर की गहराई जितना है मुझे प्यार,

पर्वत की ऊंचाई जितना है मुझे प्यार।

 यह बात समझ कर अपने आप को समझा लो,

बस एक बार तो मुझे मौत से पहले आज़मा लो।

कुछ मैंने कुछ तुमने अपने किस्से सुनाये,

मिलकर हमने प्यार के नगमें गुनगुनाये।

  मेरी नादाननियों को यूं न दिल से लगा लो, 

 बस एक बार तो मुझे मौत से पहले आज़मा लो।

 दिल में बहुत बेचैनियां भरी पड़ी हैं,

 प्यार की राह में रुकावट अड़ी पड़ी हैं।

 उलझी हुई हर पहेली को अब तो सुलझा लो,

 बस एक बार तो मुझे मौत से पहले आज़मा लो।


Mssa

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