इश्क की रुहानियत की वे बात करते हैं ,
बिन बादल ही वे बरसात करते हैं।
अश्क जिनकी आंखों में करते हैं बसर,
उनसे वह मुस्कुराने की बात करते हैं।
राह से गुजर गये एक नजर देखा नहीं,
जरिये खतों के के ही मुलाकात करते हैं।
दिल में जिसके प्यार की एक बूंद तक नहीं,
हमसे दिल लगाने की बात करते हैं।
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