समंदर की लहरों का कारवां कभी रुकता नहीं ,
पर्वत श्रृंखला का मस्तक कभी झुकता नहीं।
यादों का कर्ज तो ऐसा कर्ज है,
कितना भी चुकाओ कभी चुकता नहीं।
जिंदगी में कुछ लम्हे ऐसे आते ही हैं
दिल कितना भी संगदिल हो रुला ही जाते हैं।
यादों के ऐसे ही कितने ही लम्हे,
रह रह कर दिल पर कहर ढाते हैं।
पास आने की गुजारिश की पर नहीं आए तुम,
भुलाने की कोशिश की पर भुला न पाये हम।
प्यार की इबारत लिखी तुमने खतों में
उन खतों से दर्द की स्याही मिटा न पाये हम।
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