सोमवार, 29 मई 2023

न हों निराश ' कविता

 नर  हो न निराश करो मन को अचल,

करके अचल दे दो अपने मन को अतिशय बल। 

 निराश होने के कारण तो मिल जाएंगे कई,

पर अपने मन में भर लो आशाऐं नई।

माना कि दुनिया में पग-पग पर कांटे हैं,

 लेकिन विधाता ने फूल भी तो बांटे हैं। 

 अपनी ही नहीं सयानों की बात भी सुन लो, 

  समंदर किनारे सीप ही नहीं मोती भी चुन लो।

 ऊपर वाला है हम सभी का खेवनहार, 

  वह नहीं होने देगा किसी की भी हार।


Kalkkj

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