क्या बताऊं यारो मैं पत्नी की मार सह लेता हूं,
उसके सामने बिल्ली की तरह म्याऊं कर लेता हूं।
उसको तो कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं है,
जो कुछ कहना है अपने आप से कह लेता हूं।
क्या बताऊं कैसी बीबी मेरे पल्ले पड़ी है,
बात बात पर अपनी ही बात पर अड़ी है।
गुस्से में जब कर्कश वाणी में वह जब भी बोले
लगता है जैसे मेरी पीठ पर छड़ी पड़ी है।
मेरी जीवन नैया की वही है खेवनहार,
दिन में करता हूं उसे प्रणाम बारम्बार।
हो जाए जो कभी बहस हम दोनों के मध्य,
तो मैं कहता हूं तुम जीती और मैं गया हार।
एक बात बताऊं तुमको मेरी सुनते जाओ,
खुद ही समझो पत्नी को कभी न समझाओ।
जिंदगी की गाड़ी चलानी हो जो सरपट
तो बीवी संग जीवन सरिता में बहते जाओ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें