एक शाम तन्हाई भरी, फिर तुम्हारा साथ,
तराने प्यार के गुनगुनाते हम साथ-साथ।
ना होगी कोई भी शिकायत इस जमाने से,
तशरीफ़ रखो,मिला लो मेरे हाथ से हाथ।
हर शाम तुम्हारी याद मेरी हमसफर होती है,
मेरी हर डगर तुम्हारी ही तरफ होती है।
याद भी ना करूं तुम्हें,ऐसा तो हो नहीं सकता,
हर शाम मेरे दिल में यादों की ग़ज़ल होती है।
कितनी खुशनुमा है यह शाम तेरे आने से,
खत्म हुई तन्हाई ,जो थी एक जमाने से।
बस इतना समझ ले ऐ मेरे दिलबर,
तू मेरे लिए कम नहीं किसी खजाने से।
nkkd
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें