जमाने में आज कैसे-कैसे चलन चलते हैं,
प्रवृत्ति रहती वही चेहरे के भाव बदलते हैं।
दिल के अंदर क्या छुपा हुआ है जाने ना कोई,
हर पल चेहरा वही सिर्फ नकाब बदलते हैं।
सरल स्वभाव रखने में आखिर क्या है मुश्किल,
क्या जैसे हैं वैसे रहने से नहीं मिलती मंजिल।
हमने तो देखे हैं ऐसे ऐसे कई चेहरे ,
जो पहुंचे हैं या पहुंचेंगे मंजिल तक आज नहीं तो कल।
श्वेत वस्त्र धारण करते हैं दिल तो काला रहता,
मन में घनघोर अंधेरा बाहर चाहे उजाला रहता।
मुंह में राम बगल में छुरी वाले रहते हैं लोग,
नहीं आते इनके झांसे में यदि अपने को संभाला होता
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