करूण नयन से करबद्ध निवेदन करते,
दुःख दर्द मिले जो हमको नयनों में भरते।
हर पल हिय में अग्नि सी प्रज्वलित होती रहती,
हवन कुंड में हवन सामग्री ज्यों डलती रहती।
पल पल निहार रहे थे सुख के ही क्षण मिल जायें,
चाहा था हर कली यहां की फूल बनकर खिल जाये।
गमों का निशाँ न रहे खुशियां ही खुशियां मिल जाएं,
सागर की गोद से ज्यों सीपों में मोती मिल जाये।
अखियां थक जाती है पंथ निहार निहार
सूखे जीवन में आ नहीं पाती कोई बहार ।
ना जाने दुनियाँ में कैसे जी लेते हैं लोग,
वे तो कर भी नहीं पाते सुखों का उपभोग।
करुणा से भर जाता है दिल देख कर आंखें पथराई,
गौर से देखें तो आंखों में दिखती कितनी गहराई ।
देखकर उनके करूण नयन दिल करुणा से भर जाता,
दया दृष्टि से दिल से दिल का नाता जुड़ जाता।
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