बुधवार, 17 मई 2023

आख़िरी खत- कविता

 वह आखिरी खत जो मैंने तुम्हें लिखना चाहा,

 पर क्या बताऊं सच तो यह है कि मैं लिख नहीं पाया। 

 बहुत कोशिश की मैंने कि आखिर कुछ तो लिखूं, 

लेकिन फिर सच तो यह है की भाव ही नहीं जगा पाया। 

 जानता हूं कि  खत का ज़माना बहुत पुराना है,

 इस जमाने में आखिर खत कौन लिखता है।

 लेकिन मैंने तुम्हें इस ज़माने में भी  लिखे,

 क्योंकि खत में मेरा प्रेम शब्दों के जाल बुनता है। 

 मेरे जीवन में बहार बन कर  जब से तू आई थी,

 मेरा जीवन  एक उपवन सा खिल गया था।

एक अरसे से सुषुप्त से पड़े हुए मेरे मन को, 

 अचानक से जैसे जीवनदान मिल गया था। 

  बहुत सपने देखे थे हम दोनों ने मिलकर, 

 सोचा था आखिरी खत मे उन्हें उकेर दूंगा। 

 प्रणय निवेदन अब फिर करने का कोई भाव नहीं,

 उस आखिरी खत को बड़े जतन से कहीं सुरक्षित रख दूंगा


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