सुख और चैन कहीं खो गए थे हमारे,
खामोशी की चादर ओढ़े बैठे थे नजारे,
जब उनसे मुलाकात हुई तो,
गीत गुनगुनाने लगी बहारें।
झुकी नजरों से जब उसने देखा हमें,
क्या हुआ था हमें कैसे कहें,
दिल की बगिया में जैसे फूल खिले,
नदिया की धार में जैसे ग़म बहे।
घूम रहे थे जैसे भंवरा आवारा,
किसी फूल पर दिल नहीं आता था हमारा।
देखा जब पहली ही बार तुम्हें,
यह दिल तो हो गया बस तुम्हारा।
तुम्हारी नजर हम पर इनायत हो जाए
हमारे दिल की कलि फूल बन जाए।
इंतज़ार न करा हमें इतना,
अब तो इन्तज़ार सहा न जाए।
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