एक पल को भी तू मुझसे जुदा मत होना,
खुदा कसम तू मुझसे कभी खफा मत होना।
दिल की गहराइयों से चाहा है हमने तुम्हें,
बड़ी मुद्दतों के बाद पाया है हमने तुम्हें।
तुम्हारे आने भर से दिल की बगिया खिल जाती थी,
जैसे दुनिया भर की खुशियां हमको मिल जाती थी।
अब क्या हमारी जानम हमसे रूठ गई,
प्यार की कड़ी जो जोड़ी थी वह टूट गई।
हम तो दिल के घर से बेघर हो गये थे,
अपने आप से ही बेखबर हो गये थे।
जुदा मत होना तू कि मैं टूट जाऊंगा,
अपने आप ही से मैं रूठ जाऊंगा।
मेरे ख्यालों के समंदर में तेरी ही कश्ती है,
मुझे तो बस तू , बस तू ही जचती है।
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