दो दिलों के बीच से पर्दा हटा दीजिए,
गुलशन में आकर बहार का मजा लीजिए।
इंसान हूं मैं भी आखिर, हो ही जाती हैं,
हो गई गलतियों की सजा दीजिए।
हम बेवफा नहीं, हमसे वफा कीजिए,
हमारे बेहतर हालात की दुआ कीजिए।
नादान परिंदा समझ इस नेक दिल इंसान को,
हो गई गलतियों की सज़ा दीजिए।
मशहूर हो तो न मगरूरी का नशा कीजिए
इस तरहा अपनी न औकात बता दीजिए।
इंसान की बेहतरी तो इसी में है कि,
खुद को,हो गई गलतियों की सजा दीजिए।
लाचार है अपनी आदत से,अब क्या कीजिए,
हो गई हो हमसे कोई खता तो बता दीजिए।
यूं दूर होकर हमसे न नजरें चुराईये,
हो गई गलतियों की सज़ा दीजिए।
वक्त भी क्या क्या सितम ढाता है,
वक्त बदले तो बहुत कुछ बदल जाता है।
जो अभी तक तो आज था,
वह कल , कल में बदल जाता है।
Mssa
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