शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

मौसम कुछ उदास है- कविता

 शून्य में खड़ी हो तुम, 

बहती हुई हवाएं ना देखीं। 

जफ़ाओं को दिल से लगाया,

 मेरी वफाएं ना देखीं।

 मौसम कुछ उदास है,

 कोई न आसपास है।

 यह मौसम कभी तो बदलेगा,

 मेरे मन में यही आस है।

बिजलियां सी कौंध जाती थी कभी,

घेर  कर बैठते थे आसपास सभी। 

 ऐसा क्या हो गया कुछ तो बताओ,

 आखिर क्यों हो गए सभी अजनबी।

 क्यों जख्म देती हो मेरे जज्बातों को, 

 भूल जाओ जो हुआ उन बातों को।

देखो ना मुझे न दिन को चैन, 

 और न  नींद है रातों को।

 सोचता हूं तुम्हें कविता लिखूं,

 नहीं नहीं कोई ग़ज़ल लिखूं।

 देखे जब तू उस ग़ज़ल को,

 तो ग़ज़ल में बस मैं ही दिखूं।

तड़पता दिल मेरा क्या देखा जाएगा,

 तुम्हारा दिल मेरे ही सुर में गाएगा

 मैं जानता हूं इतना कठोर तो नहीं,

 यह दिल क्या तुम्हें रोक पाएगा।

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