रविवार, 19 जून 2022

मां और ममता

 *माँ और ममता* 


   नहीं नहीं नहीं 

मुझे कहीं और जाना नहीं। 

जहां मेरी आख खुली

जहां पहली सांस मिली

ममतामयी मां मिली

ऐसी ममता धरा पर 

और कहीं मिलेगी नहीं 

नहीं-  - - -

प्यार भरी नजरें कहाँ 

आचल की जैसी छाव कहाँ 

सर पर हाथ रख दे

हो जाये खुशनुमा जहाँ 

मां ही आसमाँ मां ही जमीं 

नहीं- - - 

 हे भोले शकर हे भोलेनाथ 

रख दो मेरे सर पर कृपा का हाथ 

 दिला दो फिर मुझे

 मां के आंचल की छांव 

 फिर मिलेगा मुझे 

 मेरे सपनों का गांव 

 और कहीं नहीं अब 

 मेरे लिए ठाव 

  मेरी काया को सांसे मिलेंगे यही 

 नहीं नहीं नहीं 

 मुझे और कहीं जाना नहीं 

 मुझे और कहीं जाना नहीं।


स्वरचित--

  सतीश गुप्ता 'पोरवाल',

  मानसरोवर, जयपुर।

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